क्रिकेट बल्ला विलो की लकड़ी से क्यों बनता है?

क्या मैं आपको 30 सेकंड में इसका जवाब बता दूँ?विलो हल्की, मज़बूत और आसानी से न चटकने वाली लकड़ी है। नियमों में विलो का नाम नहीं, बस यह लिखा है कि ब्लेड लकड़ी से ही बने। लेकिन कारीगरों ने कई लकड़ियाँ आज़माने के बाद 1890 के दशक से व्हाइट विलो नाम की हल्के रंग की विलो चुनी।

नियम कहते हैं 'केवल लकड़ी'
क्रिकेट बैट दो हिस्सों से बनता है: पकड़ने वाला हिस्सा 'हैंडल', और गेंद को मारने वाला चपटा हिस्सा 'ब्लेड'। क्रिकेट के नियमों की देखरेख MCC (मैरीलबोन क्रिकेट क्लब) करता है, और उसके नियम कहते हैं कि ब्लेड 'केवल लकड़ी से' बना होना चाहिए। यहाँ 'लकड़ी' लिखा है; विलो का नाम नहीं आता। हैंडल मुख्य रूप से बेंत और लकड़ी से बनाना तय है।

1890 के दशक से विलो पर बात तय हुई
फिर भी विलो का इस्तेमाल होता आया है, क्योंकि बैट बनाने वालों ने इसे आज़माया और यह काम आई। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के मुताबिक, 19वीं सदी के कारीगरों ने कई तरह की लकड़ियों के साथ प्रयोग किए, और 1890 के दशक से उन्होंने सैलिक्स अल्बा (Salix alba) नाम की व्हाइट विलो, यानी हल्के रंग की विलो, के सैप्रवुड (तने का बाहरी हिस्सा) को चुना। वह कम मुड़ने वाली थी, उसका घनत्व कम यानी हल्की थी, और देखने में भी अच्छी लगती थी।
हल्की, मज़बूत और चटकने में कठिन
अच्छी बैट-लकड़ी की परख उसके वज़न, झटके सोखने की क्षमता, मज़बूती, सीधे रेशे और चटकने में कठिनाई से होती है। भारतीय समाचार साइट मोंगाबे इंडिया के अनुसार, बैट के लिए ऐसी लकड़ी चाहिए जो हल्की और मज़बूत हो, और खिलाड़ी उससे ज़ोरदार शॉट मार सकें।
कश्मीर में भी उगती है बैट विलो
भारत में उत्तर के कश्मीर इलाके में भी बैट के लिए विलो उगाई जाती है। कश्मीर के बैट और इंग्लैंड के बैट एक ही तरह के पेड़ से बनते हैं, और कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि कश्मीर की विलो के गुण इंग्लैंड की विलो के बराबर हैं। 2024 के एक लेख के मुताबिक, कश्मीर में सालाना 30 लाख बैट बनते हैं, जो 10 साल में 15 गुना बढ़े हैं। वहीं, इंग्लैंड में सामग्री के मानक तय हैं, इसलिए गुणवत्ता की गारंटी देना ज़्यादा आसान है।
और जानना चाहते हैं?
- यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के अध्ययन में, बाँस से बने एक प्रोटोटाइप बैट ने हाथों तक लगभग उतना ही कंपन पहुँचाया जितना विलो का बैट।
- विलो को बैट के लिए इस्तेमाल होने लायक बड़ा होने में 15 साल तक लग सकते हैं, और बैट बनाने वाले खरीदी गई लकड़ी का 30% तक बेकार समझकर फेंक सकते हैं।
- इस किस्म के पेड़ को 'क्रिकेट-बैट विलो' के नाम से जाना जाता है, और इसकी लकड़ी लंबे समय से क्रिकेट बैट बनाने में इस्तेमाल होती आई है।

त्वरित प्रश्नोत्तरी: खुद को परखें
बैट के लिए विलो क्यों इस्तेमाल होती है?
उत्तर दिखाएँ
- क्योंकि यह बहुत भारी और सख्त होती है
- क्योंकि इसे पानी से कोई फर्क नहीं पड़ता
- क्योंकि यह हल्की और मज़बूत होती है
क्योंकि यह हल्की और मज़बूत होती है विलो हल्की, मज़बूत और चटकने में कठिन होती है, इसलिए यह ऐसे बैट के लिए उपयुक्त है जिससे ज़ोरदार शॉट मारे जा सकें।
विलो हल्की, मज़बूत और चटकने में कठिन होती है, इसलिए यह ऐसे बैट के लिए उपयुक्त है जिससे ज़ोरदार शॉट मारे जा सकें।
अगला प्रश्न ›स्रोत
- 5.3 The blade / 5.2 The handle (Law 5: The Bat)MCC (Marylebone Cricket Club), Laws of Cricket
- Bamboo cricket bats... Howzat?!University of Cambridge
- Kashmiri willow steps up to the crease and swings for recognitionMongabay India
- Salix alba var. caeruleaRoyal Horticultural Society
यह लेख 2026-10-03 तक ऊपर दिए गए स्रोतों की जाँच करके लिखा गया था। शोध आगे बढ़ने पर व्याख्याएँ बदल सकती हैं। फ़ोटो के श्रेय प्रत्येक फ़ोटो के नीचे दिए गए हैं।



