साबुन के बुलबुले इंद्रधनुषी रंग के क्यों दिखते हैं?

ये रंग बनाता है खुद प्रकाश।साबुन के बुलबुले इंद्रधनुषी रंग के दिखते हैं क्योंकि पतली परत की बाहरी सतह से और भीतरी सतह से टकराकर लौटी प्रकाश की दो किरणें आपस में मिलती हैं और हर रंग के लिए एक-दूसरे को तेज़ या कमज़ोर कर देती हैं। कौन-सा रंग दिखेगा, यह परत की मोटाई पर निर्भर करता है। मोटाई हर जगह अलग होती है और समय के साथ बदलती है, इसलिए रंग लहराते-बदलते दिखते हैं।

प्रकाश की तरंगें मिलकर तेज़ होती हैं
प्रकाश तरंग की तरह चलता है, और हर रंग की तरंग की लंबाई अलग होती है। लाल की तरंग लंबी होती है और बैंगनी की छोटी। अमेरिका के विज्ञान संग्रहालय एक्सप्लोरेटोरियम के अनुसार, जब दो प्रकाश-तरंगें शिखर-से-शिखर मिलती हैं तो एक-दूसरे को तेज़ करती हैं, और जब शिखर-से-गर्त मिलती हैं तो एक-दूसरे को मिटा देती हैं। इसे प्रकाश का 'व्यतिकरण' (इंटरफ़ेयरेंस) कहते हैं।
परत के बाहर और भीतर से दो बार लौटता है प्रकाश
जब प्रकाश साबुन के बुलबुले पर पड़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा परत की बाहरी सतह से टकराकर लौट आता है, और कुछ हिस्सा परत के भीतर जाकर भीतरी सतह से टकराकर लौटता है। भीतरी सतह से लौटे प्रकाश को परत की मोटाई जितना ज़्यादा रास्ता तय करना पड़ता है, इसलिए बाहरी सतह से लौटे प्रकाश से मिलते समय उसकी तरंगें थोड़ी आगे-पीछे हो जाती हैं। इससे परत की मोटाई के हिसाब से कुछ रंग मिट जाते हैं और बाकी रंग मिलकर वह रंग बनाते हैं जो हमें दिखता है।

मोटाई बदलने से दिखने वाला रंग बदलता है
लाल की तरंग लंबी होती है, इसलिए उसे मिटाने के लिए मोटी परत चाहिए। एक्सप्लोरेटोरियम के अनुसार, जैसे-जैसे परत पतली होती जाती है, मिटने वाला रंग लाल से पीला, हरा और नीला होता जाता है, और दिखने वाला रंग भी नीला-हरा, नीला, लाल-बैंगनी और पीला बदलता जाता है। साबुन का घोल अपने वज़न से नीचे की ओर बहता है, इसलिए परत ऊपर की ओर पतली होती जाती है, और कभी-कभी रंग धारियों में लगे दिखते हैं।
काला दिखे तो समझिए, जल्दी फूटेगा
जब परत बहुत पतली हो जाती है, तो सभी रंग मिट जाते हैं, क्योंकि बाहरी सतह से टकराकर लौटते समय प्रकाश की तरंग उलट जाती है। तब परत काली दिखने लगती है। न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय की व्याख्या में भी बताया गया है कि जब परत का ऊपरी हिस्सा प्रकाश की तरंग-लंबाई से बहुत पतला हो जाता है, तो वह काला दिखता है। यह काला हिस्सा दिखने लगे, तो यह संकेत है कि बुलबुला जल्द ही फूट जाएगा।
और जानना चाहते हैं?
- बारिश के बाद सड़क पर तेल की पतली परत, अबालोन (एक समुद्री घोंघे) के खोल का भीतरी हिस्सा, और कुछ पक्षियों के पंख तथा कीड़ों के पंख भी इंद्रधनुषी रंगों में चमकते हैं। यह उसी प्रकाश-व्यतिकरण की वजह से होता है।
- साबुन के घोल में ग्लिसरीन मिलाने से घोल चिपचिपा और धीरे बहने वाला हो जाता है, जिससे परत देर तक टिकी रहती है।

त्वरित प्रश्नोत्तरी: खुद को परखें
साबुन के बुलबुले इंद्रधनुषी रंग के क्यों दिखते हैं?
उत्तर दिखाएँ
- घोल में रंग मिलाया गया है
- लौटता प्रकाश आपस में मिलता है
- परत रंगों को सोख लेती है
लौटता प्रकाश आपस में मिलता है परत की बाहरी और भीतरी सतह से लौटता प्रकाश आपस में मिलता है, जिससे कुछ रंग तेज़ होते हैं और कुछ मिट जाते हैं। कौन-से रंग दिखेंगे, यह परत की मोटाई तय करती है।
परत की बाहरी और भीतरी सतह से लौटता प्रकाश आपस में मिलता है, जिससे कुछ रंग तेज़ होते हैं और कुछ मिट जाते हैं। कौन-से रंग दिखेंगे, यह परत की मोटाई तय करती है।
अगला प्रश्न ›स्रोत
- Bubble ColorsExploratorium
- Soap-bubbles, interference colours, surface tension, minimal shapesUNSW Sydney, School of Physics (Physclips)
यह लेख 2026-10-03 तक ऊपर दिए गए स्रोतों की जाँच करके लिखा गया था। शोध आगे बढ़ने पर व्याख्याएँ बदल सकती हैं। फ़ोटो के श्रेय प्रत्येक फ़ोटो के नीचे दिए गए हैं।



