पानी में रखी स्ट्रॉ टेढ़ी क्यों दिखती है?

पहले आप 30 सेकंड में उत्तर जान लीजिए।स्ट्रॉ खुद टेढ़ी नहीं है। पानी के अंदर वाले हिस्से से आया प्रकाश सतह पर पानी से हवा में जाते समय अपनी दिशा बदल देता है (इसे अपवर्तन कहते हैं)। पर हमारी आँखें और दिमाग़ यह मानकर चलते हैं कि प्रकाश सीधी रेखा में चलकर आया है। इसलिए सिर्फ़ पानी के अंदर वाला हिस्सा किसी और जगह पर दिखता है और स्ट्रॉ सतह पर टूटी हुई लगती है।

प्रकाश जिस दिशा से आए, वहीं चीज़ दिखती है
हमें कोई चीज़ इसलिए दिखती है क्योंकि उससे आया प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। हमें लगता है कि चीज़ उसी दिशा में है जिस दिशा से प्रकाश आया है। स्ट्रॉ का जो हिस्सा पानी से बाहर है, उसका प्रकाश सिर्फ़ हवा में चलकर आँख तक पहुँचता है, इसलिए वह हमें अपनी असली जगह पर दिखता है।
पानी की सतह पर प्रकाश की दिशा बदलती है
दूसरी ओर, पानी के अंदर वाले हिस्से से आया प्रकाश पानी से हवा में निकलते समय अपनी दिशा बदल देता है। इसे अपवर्तन कहते हैं। एक ही चीज़ के अंदर प्रकाश सीधा चलता है और दिशा सिर्फ़ पानी और हवा की सीमा पर बदलती है।
दिशा इसलिए बदलती है क्योंकि गति बदलती है
प्रकाश की दिशा इसलिए बदलती है क्योंकि उसकी गति बदल जाती है। हवा में प्रकाश लगभग 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड चलता है, पर पानी में यह धीमा होकर लगभग 2,26,000 किलोमीटर प्रति सेकंड रह जाता है। जब प्रकाश सीमा को तिरछा पार करता है, तो गति के साथ दिशा भी बदलती है। जब वह सीधा पार करता है, तो धीमा होता है पर दिशा नहीं बदलता।

आँख और दिमाग़ सीधी रेखा मानते हैं
हमारी आँखें और दिमाग़ यह नहीं जान पाते कि प्रकाश रास्ते में मुड़ गया। वे प्रकाश को सीधा आया हुआ मान लेते हैं और चीज़ को वहाँ बताते हैं जहाँ से वह सीधी रेखा पीछे की ओर जाती है। इसलिए पानी के अंदर वाला हिस्सा अपनी असली जगह से खिसका हुआ दिखता है और स्ट्रॉ सतह पर टूटी हुई लगती है। पानी के अंदर का हिस्सा बाहर के हिस्से से मोटा भी दिख सकता है।
और जानना चाहते हैं?
- स्ट्रॉ को पानी से बाहर निकालिए तो वह सीधी ही रहती है। इससे पता चलता है कि टेढ़ी दिखने की वजह प्रकाश के चलने का रास्ता था।
- पानी में प्रकाश हवा से धीमा चलता है और काँच में उससे भी धीमा, लगभग 2,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड। जो चीज़ प्रकाश को जितना धीमा करती है, उसमें प्रकाश उतना ही ज़्यादा मुड़ता है।
- आवर्धक लेंस (मैग्निफ़ाइंग ग्लास), प्रिज़्म और इंद्रधनुष सब प्रकाश के मुड़ने यानी अपवर्तन से बनते हैं। हमारी आँखें भी प्रकाश इकट्ठा करने के लिए अपवर्तन का ही इस्तेमाल करती हैं।

त्वरित प्रश्नोत्तरी: खुद को परखें
पानी में रखी स्ट्रॉ टेढ़ी क्यों दिखती है?
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- प्रकाश की दिशा बदल जाती है
- पानी स्ट्रॉ को मोड़ देता है
- पानी प्रकाश सोख लेता है
प्रकाश की दिशा बदल जाती है पानी के अंदर से आया प्रकाश सतह पर दिशा बदल देता है, पर हमारी आँखें और दिमाग़ मानते हैं कि प्रकाश सीधा आया है, इसलिए वह हिस्सा खिसका हुआ दिखता है।
पानी के अंदर से आया प्रकाश सतह पर दिशा बदल देता है, पर हमारी आँखें और दिमाग़ मानते हैं कि प्रकाश सीधा आया है, इसलिए वह हिस्सा खिसका हुआ दिखता है।
अगला प्रश्न ›स्रोत
- Refraction and SightThe Physics Classroom
- Refraction of lightScience Learning Hub (University of Waikato)
- Bent PencilSchool of Physics, The University of Sydney
यह लेख 2026-10-03 तक ऊपर दिए गए स्रोतों की जाँच करके लिखा गया था। शोध आगे बढ़ने पर व्याख्याएँ बदल सकती हैं। फ़ोटो के श्रेय प्रत्येक फ़ोटो के नीचे दिए गए हैं।



