ऑरोरा हरे और लाल क्यों चमकते हैं?

दरअसल, ये रंग हवा के छोटे-छोटे कणों से निकलने वाली रोशनी हैं।ऑरोरा के रंग तब बनते हैं जब अंतरिक्ष से आए इलेक्ट्रॉन आसमान में ऊपर ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से टकराकर उन्हें चमकाते हैं। जो हरा हमें सबसे अधिक दिखता है और जो लाल उससे ऊपर दिखता है, दोनों ऑक्सीजन की रोशनी हैं, जबकि नीला, बैंगनी और गुलाबी मुख्यतः नाइट्रोजन से आते हैं। रोशनी कितनी ऊँचाई पर निकलती है, उसी से रंग बदलता है।

ऑरोरा आसमान में एक नियॉन साइन जैसा है
अमेरिकी राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, ऑरोरा तब होता है जब सूर्य से बहने वाली हवा (सौर हवा) की ऊर्जा से पृथ्वी के चारों ओर अंतरिक्ष में तेज़ हुए इलेक्ट्रॉन, चुंबकीय बल रेखाओं के साथ आसमान में नीचे उतरते हैं और 100 किलोमीटर या उससे अधिक ऊँचाई पर हवा के कणों से टकराकर उन्हें चमकाते हैं। यह बिल्कुल नियॉन साइन की तरह काम करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन ट्यूब के अंदर गैस से टकराकर उसे चमकाते हैं।
हरा और लाल ऑक्सीजन के रंग हैं
जब ऑक्सीजन या नाइट्रोजन से टक्कर होती है, तो वह ऊर्जा लेकर थोड़ी देर के लिए ऊर्जा से भर जाता है। जब वह वापस सामान्य होता है, तो प्रकाश छोड़ता है। हल्का हरा जो हमें सबसे अधिक दिखता है और गहरा लाल जो कम दिखता है, दोनों ऑक्सीजन की रोशनी हैं। ऑक्सीजन के ऊर्जा से भरने का तरीका बदलने पर वह हरा या लाल चमकता है।
हर रंग अलग ऊँचाई पर चमकता है
लाल रोशनी छोड़ने वाली अवस्था वाली ऑक्सीजन को चमकने से पहले 150 सेकंड से अधिक लगते हैं। नीचे, जहाँ हवा घनी होती है, वह उससे पहले दूसरे कणों से टकरा जाता है और चमक नहीं पाता, इसलिए लाल रोशनी केवल ऊपर, जहाँ हवा पतली है, दिखाई देती है। हरा लगभग 1 सेकंड में निकल सकता है, इसलिए वह नीचे भी चमकता है। सामान्य ऊँचाइयाँ स्रोत के अनुसार अलग-अलग हैं: NOAA हरे के लिए 120–400 किलोमीटर और लाल के लिए 300 किलोमीटर से ऊपर बताता है, जबकि NASA हरे के लिए 100–200 किलोमीटर और लाल के लिए 200 किलोमीटर से ऊपर बताता है।
NOAA और NASA अलग-अलग ऊँचाई के आँकड़े देते हैं, इसलिए लेख में दोनों दिए गए हैं।

बैंगनी और गुलाबी नाइट्रोजन के रंग हैं
ऑरोरा का निचला किनारा कभी-कभी बैंगनी या गुलाबी दिखता है। यह मुख्यतः नाइट्रोजन से निकलने वाली रोशनी है। नाइट्रोजन टकराने के लगभग तुरंत बाद प्रकाश छोड़ता है, इसलिए वह और नीचे भी चमक सकता है। भोर या शाम के समय, सूरज की रोशनी ऊपर की नाइट्रोजन से टकराकर उसे बैंगनी चमका सकती है।
और जानना चाहते हैं?
- कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें ऑरोरा सफ़ेद-सा दिखा। NOAA समझाता है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंधेरे में इंसान की आँखों को रंग पहचानने में कठिनाई होती है, और तेज़ ऑरोरा अपने असली रंग दिखाता है।
- जो हरा प्रकाश हमें सबसे अधिक दिखता है, वह एक निश्चित रंग का प्रकाश है, जिसकी तरंग दैर्ध्य 557.7 नैनोमीटर है।
- "ऑरोरा" नाम लैटिन भाषा के 'भोर की देवी' शब्द से आया है, और कहा जाता है कि गैलीलियो ने सबसे पहले इसका इस्तेमाल किया था।

त्वरित प्रश्नोत्तरी: खुद को परखें
ऑरोरा की हरी रोशनी किससे निकलती है?
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- नाइट्रोजन
- हाइड्रोजन
- ऑक्सीजन
ऑक्सीजन अंतरिक्ष से आए इलेक्ट्रॉन आसमान में ऊपर ऑक्सीजन से टकराते हैं, जिससे हरी रोशनी निकलती है। बैंगनी और गुलाबी मुख्यतः नाइट्रोजन से आते हैं।
अंतरिक्ष से आए इलेक्ट्रॉन आसमान में ऊपर ऑक्सीजन से टकराते हैं, जिससे हरी रोशनी निकलती है। बैंगनी और गुलाबी मुख्यतः नाइट्रोजन से आते हैं।
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- Aurora TutorialNOAA / NWS Space Weather Prediction Center
- AurorasNASA Science
यह लेख 2026-10-03 तक ऊपर दिए गए स्रोतों की जाँच करके लिखा गया था। शोध आगे बढ़ने पर व्याख्याएँ बदल सकती हैं। फ़ोटो के श्रेय प्रत्येक फ़ोटो के नीचे दिए गए हैं।



